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Koi Nahi Hai Apna: सुमी हिरण और मतलबी दोस्त

क्या मुसीबत में दोस्त काम आते हैं? पढ़िए 'कोई नहीं है अपना' की यह जंगल कहानी जहाँ सुमी हिरण को पता चला कि दुनिया में अपनी हिम्मत ही सबसे बड़ा सहारा है।

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बचपन से हमें सिखाया जाता है कि "दोस्त ही सुख-दुःख के साथी होते हैं।" लेकिन क्या हर दोस्त सच्चा होता है? कभी-कभी जीवन हमें कठोर सबक सिखाता है कि जब असली मुसीबत आती है, तो Koi Nahi Hai Apna (कोई नहीं है अपना), सिवाय हमारी अपनी ताकत और बुद्धि के। यह कहानी 'नंदनवन' के एक भोले-भाले हिरणसुमी की है, जिसे अपनी दोस्ती पर बहुत घमंड था, लेकिन एक शिकारी कुत्ते के हमले ने उसकी आँखों से पट्टी हटा दी।

कहानी: दोस्ती का भ्रम और हकीकत

सुमी का बड़ा दिल और जंगल परिवार

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नंदनवन जंगल में सुमी नाम का एक सुनहरा हिरण रहता था। सुमी दिखने में बहुत सुंदर था—सुनहरी खाल, उस पर सफेद धब्बे और गले में कुदरती रूप से उगे फूलों की एक माला जैसी लकीर। लेकिन सुमी की असली सुंदरता उसका दिल था।

सुमी मानता था कि पूरा जंगल उसका परिवार है। अगर गज्जू हाथी को खुजली होती, तो सुमी अपनी सींगों से उसकी पीठ खुजा देता। अगर बंटी बंदर के हाथ से फल गिर जाता, तो सुमी उसे उठाकर दे देता। सुमी अक्सर सोचता, "मैं सबकी इतनी मदद करता हूँ, अगर मुझ पर कभी मुसीबत आई, तो पूरा जंगल मेरे लिए खड़ा हो जाएगा।"

उसकी माँ उसे अक्सर समझाती थीं, "बेटा सुमी, अच्छा होना अच्छी बात है, लेकिन दूसरों पर पूरी तरह निर्भर मत रहना। इस जंगल का नियम है—अपनी रक्षा स्वयं करो।" सुमी हँस कर टाल देता, "अरे माँ! तुम तो बस डरती रहती हो। मेरे दोस्त गज्जू और बंटी को देखो, वे कितने ताकतवर हैं। वे मुझे कुछ नहीं होने देंगे।"

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खतरे की घंटी

एक दोपहर, जंगल में अजीब सी शांति थी। सुमी एक ठंडे झरने के पास ताजी घास चर रहा था। उसके पास ही गज्जू हाथी अपनी सूंड से पानी उड़ा रहा था और बंटी बंदर पेड़ पर बैठा जामुन खा रहा था।

अचानक, हवा का रुख बदला। सुमी के कान खड़े हो गए। उसे सूखी पत्तियों के चरमराने की आवाज़ आई। यह आवाज़ किसी आम जानवर की नहीं थी। यह आवाज़ थी खूंखार जंगली कुत्तों (Wild Dogs) के झुंड की।

जंगल में जंगली कुत्ते सबसे खतरनाक माने जाते थे क्योंकि वे झुंड में हमला करते थे और शिकार को नोच डालते थे। "भागो! कुत्ते आ रहे हैं!" एक तोते ने ऊपर से चिल्लाकर चेतावनी दी।

भ्रम का टूटना

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सुमी घबरा गया। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उसने देखा कि कुत्तों का झुंड उसी की तरफ बढ़ रहा है। सुमी ने सोचा, "मुझे डरने की क्या ज़रूरत है? मेरे पास गज्जू हाथी है।"

वह दौड़कर गज्जू के पास गया और बोला, "गज्जू दादा! गज्जू दादा! मुझे अपनी सूंड से उठाकर अपनी ऊँची पीठ पर बैठा लो। वो कुत्ते मुझे मार डालेंगे!"

गज्जू हाथी, जो अब तक सुमी का 'सबसे अच्छा दोस्त' था, पीछे हट गया। उसने कहा, "अरे सुमी, माफ़ करना भाई। अगर मैंने तुम्हें अपनी पीठ पर बैठाया, तो वो कुत्ते मेरे पैरों को काट लेंगे। मेरी चमड़ी मोटी है, पर मुझे भी दर्द होता है। तुम कहीं और छुप जाओ।"

सुमी सन्न रह गया। उसे अपनी कानों पर विश्वास नहीं हुआ। बिना समय गंवाए, वह पास के पेड़ की तरफ भागा जहाँ बंटी बंदर बैठा था। "बंटी भाई! जल्दी से अपना हाथ बढ़ाओ और मुझे ऊपर खींच लो! प्लीज!" सुमी गिड़गिड़ाया।

बंटी बंदर ने ऊपर से नीचे देखा और मुंह फेर लिया। "अरे सुमी, तुम बहुत भारी हो। अगर मैंने तुम्हें खींचा, तो डाल टूट जाएगी और मैं भी नीचे गिर जाऊंगा। अपनी जान खुद बचाओ दोस्त!"

अपनी ताकत का अहसास

कुत्तों की आवाज़ें अब बिल्कुल पास आ गई थीं। सुमी अकेला खड़ा था। जिन दोस्तों पर उसे नाज़ था, वे सब अपनी जान बचाने में लगे थे। उस पल सुमी को अपनी माँ की बात याद आई—"कोई नहीं है अपना, सिवाय अपनी ताकत के।"

सुमी ने अपनी आंसुओं से धुंधली आँखों को साफ़ किया। उसने अपनी पतली लेकिन मजबूत टांगों की तरफ देखा। उसे याद आया कि कुदरत ने उसे जंगल में सबसे तेज़ दौड़ने की शक्ति दी है।

"मुझे किसी की ज़रूरत नहीं है," सुमी ने खुद से कहा।

जैसे ही पहला कुत्ता झपटा, सुमी हवा की रफ़्तार से वहाँ से निकला। उसने ऐसी छलांग लगाई कि कुत्ता बस धूल चाटता रह गया। सुमी झाड़ियों के ऊपर से, पत्थरों के बीच से और नालों को पार करते हुए दौड़ा। गज्जू की ताकत और बंटी की ऊंचाई धरी की धरी रह गई, और सुमी की अपनी रफ़्तार उसे मौत के मुंह से निकाल ले गई।

नई समझ

सुमी दौड़ते-दौड़ते जंगल के दूसरे छोर पर एक सुरक्षित गुफा में पहुँच गया। वह हांप रहा था, लेकिन ज़िंदा था।

शाम को जब खतरा टल गया, तो गज्जू और बंटी उसे ढूंढते हुए आए। "अरे सुमी, तुम बच गए! चलो अच्छा हुआ। हम तो बहुत डर गए थे," बंटी ने हंसते हुए कहा, जैसे कुछ हुआ ही न हो।

सुमी ने उन्हें देखा, लेकिन इस बार उसकी आँखों में वो पुराना वाला भोलापन नहीं था। उसने शांत स्वर में कहा, "हाँ, मैं बच गया। लेकिन तुम्हारी वजह से नहीं, अपने पैरों की वजह से। आज मुझे समझ आ गया कि अच्छे वक्त में सब दोस्त होते हैं, लेकिन बुरे वक्त में कोई नहीं है अपना।"

सुमी ने उनसे लड़ाई नहीं की, लेकिन उस दिन के बाद उसने कभी किसी पर अंधा भरोसा नहीं किया। वह अब भी सबकी मदद करता था, लेकिन अपनी सुरक्षा की डोर उसने अपने ही हाथ में रखी।

निष्कर्ष: आत्मनिर्भरता ही असली मित्र है

सुमी की कहानी हमें बताती है कि दुनिया बुरी नहीं है, लेकिन हर कोई पहले अपना भला सोचता है। इसलिए, हमें खुद को इतना मजबूत बनाना चाहिए कि मुसीबत आने पर हमें किसी के सहारे की ज़रूरत न पड़े।

इस कहानी से सीख (Moral)

इस कहानी से हमें यह अनमोल सीख मिलती है:

  1. आत्मनिर्भर बनें (Be Self-Reliant): आपकी अपनी विद्या, बुद्धि और शरीर ही आपके सच्चे मित्र हैं।

  2. अंधा भरोसा न करें: दोस्तों पर भरोसा करो, लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए उन पर निर्भर मत रहो। 

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